मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
मुझसे संपर्क साधना बहुत आसान है... ab8oct@gmail.com पर मेल कर सकते है, http://ab8oct.blogspot.com/, http://humarinayisubah.blogspot.com/ पर मेरे विचारों को पढ़ सकते है....
http://facebook.com/ab8oct या http://twitter.com/ab8oct जैसे सोसल साईट पर मुझसे जुड़ सकते है...

बुधवार, 29 जून 2011

कौन हूँ मैं???

कौन हूँ मैं???
जीवन के नाम पर एक गलती हूँ
या मौत का इन्तजार हूँ मैं
दर्द की परछाई हूँ
या ग़मों का काला चेहरा हूँ मैं
आंसुओं की कतार हूँ मैं
या फिर तकलीफों का गुबार हूँ
समाज के लिए एक अनचाहा उपहार हूँ
या किस्मत की हार हूँ मैं
किसी के लिए हंसी-मुस्कान हूँ
या रोने का मजमून हूँ मैं
किसी का गर्व हूँ या
अभिव्यक्ति पर कड़ा प्रहार हूँ मैं
वजूद का एहसास हूँ
या शर्म की दीवार हूँ मैं
कोई तो बता देना
कौन हूँ मैं???

मंगलवार, 7 जून 2011

रामदेव, रामदेव, रामदेव... सत्याग्रह, सत्याग्रह, सत्याग्रह....

रामदेव, रामदेव, रामदेव... सत्याग्रह,  सत्याग्रह, सत्याग्रह.... पूरा हाई प्रोफाइल ड्रामा देखने को मिला... रामदेव की अच्छी खासी नौटंकी भी, दिग्विजय सिंह की घबराहट भी, सिब्बल की परेशानी और सरकार का दर भी... भाजपा का सियासी दांव भी और लगभग ख़त्म हो चुके कई नेताओं के मुखमंडल पे एक बार फिर सत्ता में आ सकने की उम्मीद भी... संघ की छटपटाहट भी देखी, पुलिसिया बर्बरता भी देखी, प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति की चुप्पी भी देखी... आम लोगों की चीख उनकी तकलीफ भी देखी... बहुत कुछ देखने के लिए मिला...

पर सीधा सा और छोटा सा सवाल... रामदेव सियासी दांव चल रहे हो मान लेता हूँ पर हजारों मासूम लोगों का क्या कसूर था???... वो कौन सी सियासी चाल चल रहे थे... रात के अँधेरे में, बेगुनाह चुपचाप सोये हुए लोगों पर पुलिसिया तांडव का क्या मतलब था???... बेगुनाह बच्चों का, औरतों का क्या कसूर था???... किसी ने कहा रामदेव ने योग के लिए मैदान लिया और सत्याग्रह करने लगे... उनके लिए सिर्फ एक सवाल, मुझ आम आदमी को पता था कि ४ जून से रामलीला मैदान पर सत्याग्रह होने वाला है... क्या सरकार को नहीं पता था???... और अगर सरकार को नहीं पता था तो सिब्बल और चिदंबरम रामदेव के साथ कौन सी मीटिंग कर रहे थे, उनसे मिलने किस खौफ से गए थे???... अगर पुलिस सत्याग्रह का दमन ही करना चाहती थी तो कारवाई दिन के उजाले को छोड़ कर रात के अँधेरे में क्यों हुआ... क्या रामलीला मैदान पर कोई दंगा या मार-पीट हो रहा था जो पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े...

इतना कुछ हो गया पर प्रधानमन्त्री ने संज्ञान क्यों नहीं लिया... उनके मुख से आम लोगों के लिए सहानुभूति क्यों नहीं निकली... खैर उन्हें तो मैडम सोनिया से आर्डर नहीं मिला होगा इन सब के लिए... पर हमारी रास्त्रपति महोदया क्या कर रही थी... क्या उन्हें खबर नहीं थी इसकी या वो देश की खबर लेती ही नहीं...या उन्हें भी किसी और के आर्डर का इन्तेजार रहता है... दिल्ली की मुख्यमंत्री साहिबा कहाँ थी... अपने घर के ए. सी. कमरे में आराम फरमा रही थी... वैसे भी गर्मी बहुत थी... कल सर्वोच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए नोटिस तो जारी किया... पर पूछना चाहूँगा कि उन्हें जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय क्यों दिया गया जबकि मेरे ख्याल से इसके लिए दो घंटे बहुत ज्यादा थे...

खैर एक सीधा सा गंभीर सवाल आम जनता के लिए... अब हमें किसका इन्तेजार है... कब हम जागेंगे...

शनिवार, 4 जून 2011

मैं शादी शुदा हूँ...

कल एक दोस्त आया हुआ था घर पर... लगभग साल भर बाद मुलाक़ात हो रही थी उससे... आते ही पूछा उसने,
"भाभी कहाँ है यार?"...
मैं चकरा गया... ये क्या नया बला है... मैंने भी उससे पूछ डाला,
"साले तुने अपनी बीवी मेरे पास छोड़ी कब थी?"...
जोर से ठहाके लगाते हुए कहा उसने,
"अच्छा मजाक करते हो.. एक तो शादी कर ली, बुलाना तो छोड़ बताया तक नहीं... और अभी मजाक करता है.... मायके गयी हुई है क्या?"...
"अबे, मैंने कब शादी की? शादी करता तो तुझे नहीं बुलाता क्या? तुझे कहाँ से खबर लग गयी?"
"अबे तुने ही तो अपने प्रोफाइल में अपडेट कर रखा है..."
"तू फेसबुक-ऑरकुट की बात कर रहा है क्या?"
"और नहीं तो क्या?... फेसबुक पर तो तुने अपनी बीवी का प्रोफाइल तक अटैच कर रखा है अपनी प्रोफाइल से... मैं भी उसकी फ्रेंड लिस्ट में हूँ..."
"ओह... अब समझा..."

ऐसी स्थिति लगभग बहुत से लोगों की है... इनमें कसूर उनका है भी नहीं.... हाँ मुझे समझाने में शायद थोड़ी गलती हो गयी... तो आज एक बहुत बड़ा खुलासा करने जा रहा हूँ अपने बारे में... बहुत से लोगों को धक्का लगेगा ये जान कर... पर हिम्मत बनाये रखियेगा...

दोस्तों तो सच बता रहा हूँ... मेरी शादी हो चुकी है... हाँ मैं मैरिड हूँ... शादीशुदा हूँ... सहर नाम है उसका... पर जिससे मैंने शादी की है वो कोई लड़की नहीं है... इसका ये मतलब बिलकुल नहीं कि वो कोई लड़का है (धारा ३७७ के बिलकुल खिलाफ हूँ, और सबकुछ ठीक भी है मेरे साथ)...

सहर नाम है मेरी सोंच का... सहर नाम है इक सपना का... सहर विश्वास का नाम है... उम्मीद का नाम है... जीने की वजह का नाम है सहर... सहर जज्बे का नाम है... एक हिम्मत का नाम है सहर... सहर दुःख में भी मुस्कुराने का नाम है... सहर खुशियों में आँखों के भींग जाने का नाम है... सहर मेरी जिंदगी का नाम है... सहर मतलब सुबह... सुबह मेरी जिंदगी की... सहर... हाँ सहर... वही मेरी बीवी है... मैं शादी शुदा हूँ...

wibiya widget