कल एक दोस्त आया हुआ था घर पर... लगभग साल भर बाद मुलाक़ात हो रही थी उससे... आते ही पूछा उसने,
"भाभी कहाँ है यार?"...
मैं चकरा गया... ये क्या नया बला है... मैंने भी उससे पूछ डाला,
"साले तुने अपनी बीवी मेरे पास छोड़ी कब थी?"...
जोर से ठहाके लगाते हुए कहा उसने,
"अच्छा मजाक करते हो.. एक तो शादी कर ली, बुलाना तो छोड़ बताया तक नहीं... और अभी मजाक करता है.... मायके गयी हुई है क्या?"...
"अबे, मैंने कब शादी की? शादी करता तो तुझे नहीं बुलाता क्या? तुझे कहाँ से खबर लग गयी?"
"अबे तुने ही तो अपने प्रोफाइल में अपडेट कर रखा है..."
"तू फेसबुक-ऑरकुट की बात कर रहा है क्या?"
"और नहीं तो क्या?... फेसबुक पर तो तुने अपनी बीवी का प्रोफाइल तक अटैच कर रखा है अपनी प्रोफाइल से... मैं भी उसकी फ्रेंड लिस्ट में हूँ..."
"ओह... अब समझा..."
ऐसी स्थिति लगभग बहुत से लोगों की है... इनमें कसूर उनका है भी नहीं.... हाँ मुझे समझाने में शायद थोड़ी गलती हो गयी... तो आज एक बहुत बड़ा खुलासा करने जा रहा हूँ अपने बारे में... बहुत से लोगों को धक्का लगेगा ये जान कर... पर हिम्मत बनाये रखियेगा...
दोस्तों तो सच बता रहा हूँ... मेरी शादी हो चुकी है... हाँ मैं मैरिड हूँ... शादीशुदा हूँ... सहर नाम है उसका... पर जिससे मैंने शादी की है वो कोई लड़की नहीं है... इसका ये मतलब बिलकुल नहीं कि वो कोई लड़का है (धारा ३७७ के बिलकुल खिलाफ हूँ, और सबकुछ ठीक भी है मेरे साथ)...
सहर नाम है मेरी सोंच का... सहर नाम है इक सपना का... सहर विश्वास का नाम है... उम्मीद का नाम है... जीने की वजह का नाम है सहर... सहर जज्बे का नाम है... एक हिम्मत का नाम है सहर... सहर दुःख में भी मुस्कुराने का नाम है... सहर खुशियों में आँखों के भींग जाने का नाम है... सहर मेरी जिंदगी का नाम है... सहर मतलब सुबह... सुबह मेरी जिंदगी की... सहर... हाँ सहर... वही मेरी बीवी है... मैं शादी शुदा हूँ...